
क़तर की राजधानी दोहा में इसराइल द्वारा हमास नेताओं पर किए गए हवाई हमले को लेकर भारत ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने इस हमले को लेकर चिंता जताई है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संयम बरतने की अपील की है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा:
“हमने दोहा में इसराइली हमलों से जुड़ी रिपोर्ट्स देखी हैं। हम इस घटनाक्रम और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर इसके प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।”
भारत ने सभी पक्षों से संयम और कूटनीति अपनाने की अपील की ताकि क्षेत्रीय शांति बनी रहे और कोई नई उथल-पुथल न हो।
हमले का निशाना: हमास के सीनियर लीडर्स
इसराइल ने पुष्टि की है कि उसने दोहा में हमास के उन वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया जो 7 अक्टूबर 2023 के हमले की योजना से जुड़े थे। इस हमले में हमास के पांच सदस्य मारे गए, जिनमें वरिष्ठ नेता खलील अल-हया के बेटे हुमाम और उनके कार्यालय के डायरेक्टर जिहाद लबाद शामिल हैं।
इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा:
“यह हमला पूरी तरह जायज़ था। हमले का लक्ष्य वे लोग थे जो निर्दोष नागरिकों पर हमला करवाने के ज़िम्मेदार हैं।”
क़तर और हमास की तीखी प्रतिक्रिया
क़तर ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे “कायराना” व अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन बताया है।
क़तर सरकार का बयान:
“हम क़तर की संप्रभुता पर हमले को स्वीकार नहीं करेंगे। यह हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।”
हमास ने भी इस हमले को विफल “हत्याकांड” बताया है और दावा किया है कि सीज़फायर की बातचीत कर रहे प्रतिनिधिमंडल को निशाना बनाने की कोशिश नाकाम रही।
ट्रंप बोले: “मैं खुश नहीं हूं”
इस मुद्दे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा:
“मैं इससे बहुत खुश नहीं हूं। हम बंधकों को छुड़ाना चाहते हैं, लेकिन यह स्थिति अच्छी नहीं है।”
उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में कुछ भी हैरान नहीं करता, और गुरुवार को इस मुद्दे पर विस्तार से बयान देंगे।
ट्रंप-नेतन्याहू-क़तर के बीच कॉल
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी के मुताबिक, हमले के बाद ट्रंप ने इसराइल के प्रधानमंत्री, क़तर के अमीर, और प्रधानमंत्री से बात की। कॉल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ भी शामिल थे।
क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक प्रतिक्रियाएं
इसराइल और हमास के बीच चल रहे टकराव के बीच क़तर की राजधानी में इसराइली हमला, वैश्विक स्तर पर नई राजनीतिक बहस छेड़ रहा है। भारत जैसे देश जो क्षेत्रीय शांति के समर्थक हैं, उन्होंने डिप्लोमेसी को प्राथमिकता देने की वकालत की है।
भारत की प्रतिक्रिया दिखाती है कि दुनिया इस तरह की कार्रवाइयों को लेकर संवेदनशील है और संघर्ष की बजाय समाधान चाहती है। अब देखना है कि क़तर, इसराइल और अमेरिका के बीच बातचीत से आगे क्या दिशा निकलती है।
दोनों दोस्त फिर से मिलते हैं, तो “हाउडी मोदी 2.0” की स्क्रिप्ट भी तैयार

